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भारतमाला घोटाला: 18 गुना मुआवजा घोटाले में फंसे पूर्व SDM निर्भय साहू, कोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई

रायपुर।     छत्तीसगढ़ की बहुचर्चित भारतमाला सड़क परियोजना घोटाले में रायपुर के तत्कालीन एसडीएम रहे निर्भय कुमार साहू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। घोटाले में गिरफ्तारी से बचने के लिए साहू ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, लेकिन भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (EOW/ACB) की विशेष अदालत ने उनका आवेदन खारिज कर दिया।

निर्भय साहू पर आरोप है कि उन्होंने रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला कॉरिडोर निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कीं। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि कुछ विशेष जमीन मालिकों को फायदा पहुंचाने के लिए उन्होंने जानबूझकर गलत मुआवजा वितरित किया। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि साहू ने न केवल लापरवाही बरती, बल्कि सरकारी धन का दुरुपयोग भी किया जिससे राज्य को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

गौरतलब है कि इस घोटाले की शिकायत सबसे पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू और भाजपा किसान मोर्चा के नेता गौरीशंकर श्रीवास ने की थी। श्रीवास के अनुसार, यह मामला करीब साढ़े तीन साल पुराना है, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी।

18 गुना ज्यादा मुआवजा, सरकारी धन की खुली लूट

घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अभनपुर इलाके में किसानों की जमीन अधिग्रहित कर रिकॉर्ड में हेरफेर कर मुआवजा राशि को 18 गुना तक बढ़ा दिया गया। इसके बाद इस रकम का बड़ा हिस्सा अधिकारियों और भू-माफियाओं की जेब में चला गया, जबकि किसानों को नाममात्र का भुगतान किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय जांच समिति गठित की गई थी। रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने पांच महीने पहले साहू को निलंबित कर दिया था, जब वे जगदलपुर नगर निगम के आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। अवर सचिव क्लेमेंटिना लकड़ा ने निलंबन की अधिसूचना जारी की थी।

अब जब कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, तो साहू की गिरफ्तारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। भारतमाला परियोजना घोटाले में यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी पहल मानी जा रही है।