Special Story

तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…

तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का हुआ तबादला, देखें लिस्ट…

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से…

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुनी गईं लक्ष्मी वर्मा और फूलोदेवी नेताम, विधानसभा पहुंचकर लिया प्रमाण पत्र, समर्थकों ने दी बधाई

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी फूलोदेवी…

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

अस्पताल परिसर में लगी भीषण आग, आधा दर्जन कंडम एंबुलेंस समेत अन्य वाहन जलकर खाक

Shiv Mar 9, 2026 1 min read

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में…

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

बिलासपुर में अवैध हुक्का बार पर पुलिस की दबिश, होटल मैनेजर गिरफ्तार

Shiv Mar 9, 2026 2 min read

बिलासपुर। जिले में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार पर…

March 9, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

भारतमाला परियोजना घोटाला: उच्च न्यायालय ने एसडीएम निर्भय साहू सहित सभी आरोपी राजस्व अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मंगलवार को भारतमाला परियोजना घोटाले के आरोपी राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिकाएँ खारिज कर दीं। ये सभी अधिकारी ईओडब्ल्यू-एसीबी द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के प्रकरण में आरोपी हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेशचन्द्र सिन्हा की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। जिन आरोपियों की याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू, लेखराम देवांगन, लखेश्वर प्रसाद किरन, शशिकांत कुर्रे, डी.एस. उइके, रौशन लाल वर्मा और दीपक देव शामिल हैं। साहू के अलावा बाकी सभी आरोपी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी हैं।

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने दर्ज किया था प्रकरण

ईओडब्ल्यू और एसीबी ने इन अधिकारियों के खिलाफ भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी के आरोप में मामला दर्ज किया था। जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने भूमाफियाओं को मिलीभगत से कई गुना ज्यादा मुआवजा राशि दिलवाई, जिससे सरकार को करीब 600 करोड़ रुपये की हानि हुई। इस मामले के उजागर होने के बाद सभी आरोपियों को निलंबित कर दिया गया था।

अदालत ने माना — “मामला गंभीर, अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती”

मंगलवार को सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत के लिए दायर याचिकाओं पर बहस हुई। अदालत ने कहा कि मामला गंभीर आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसकी जांच अभी जारी है। ऐसे में आरोपियों को अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। इस आधार पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने सभी याचिकाएं निरस्त कर दीं।

ईओडब्ल्यू ने पेश किया था 8 हजार पन्नों का चालान

गौरतलब है कि हाल ही में ईओडब्ल्यू-एसीबी ने इस प्रकरण में 8 हजार से अधिक पन्नों का चालान जिला विशेष न्यायालय में पेश किया था। जांच एजेंसी की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल डॉ. सौरभ कुमार पांडेय ने अदालत में पक्ष रखा। अदालत ने कहा कि घोटाले की जांच पूरी होने तक आरोपियों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।

अब आगे की कार्रवाई तेज करेगी ईओडब्ल्यू

अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद अब ईओडब्ल्यू इन अधिकारियों के खिलाफ गिरफ्तारी की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। एजेंसी ने पहले ही संबंधित भूमि अधिग्रहण दस्तावेज, भुगतान रेकॉर्ड और खातों की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कुछ और अधिकारियों और बिचौलियों से पूछताछ की जा सकती है।