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भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला : 10 आरोपियों के खिलाफ EOW ने 7600 पन्नों का चालान कोर्ट में पेश किया

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले से जुड़ी जांच में एक बड़ा मोड़ आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस बहुचर्चित मामले में अपनी विस्तृत जांच पूरी करते हुए 10 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चालान पेश कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह चालान लगभग 7600 पन्नों का है, जिसमें पूरे घोटाले की रूपरेखा, दस्तावेजी साक्ष्य, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन का ब्योरा शामिल है।

10 आरोपी बने EOW की कार्रवाई के निशाने पर

EOW ने जिन 10 आरोपियों के खिलाफ यह चालान पेश किया है, उनमें प्रमुख नाम हरमीत सिंह खनूजा, उमा तिवारी, केदार तिवारी, विजय जैन, कुंदन बघेल, भोजराज साहू, खेमराज कोसले, पुन्नूराम देशलहरे, गोपाल वर्मा और नरेंद्र नायक शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने मिलजुलकर भारतमाला प्रोजेक्ट के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट और आर्थिक अनियमितताओं को अंजाम दिया।

सूत्रों के अनुसार, EOW की जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों ने फर्जी कंपनियों और दस्तावेजों के जरिए प्रोजेक्ट के ठेकों और भुगतान में हेराफेरी की। इसके तहत सरकारी फंड का बड़ा हिस्सा निजी खातों में ट्रांसफर कराया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कई काम अधूरे या शुरू ही नहीं हुए थे।

7600 पन्नों में दर्ज है घोटाले की पूरी कहानी

EOW की ओर से तैयार यह चालान अब तक के सबसे विस्तृत चार्जशीट्स में से एक माना जा रहा है। इसमें बैंक ट्रांजैक्शन, कंपनियों के पंजीकरण दस्तावेज, ईमेल रिकॉर्ड्स, मोबाइल कॉल डिटेल्स, और ठेके की स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़ी पूरी फाइलिंग शामिल है।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण, मापदंड निर्धारण और भुगतान प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत थी। इनसे जुड़े कई अफसरों और ठेकेदारों से EOW पहले ही पूछताछ कर चुकी है, जिनके बयान चालान में संलग्न किए गए हैं।

कोर्ट में अगली सुनवाई में तय होगी आगे की रणनीति

EOW की विशेष अदालत ने चालान को स्वीकार कर लिया है और अब जल्द ही इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि किन धाराओं के तहत आरोप तय किए जाएंगे और आगे की सुनवाई कब शुरू होगी।

क्या है भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला?

भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत देशभर में सड़कों और हाइवे का जाल बिछाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इस प्रोजेक्ट के तहत कई बड़ी सड़क परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं। लेकिन EOW की जांच में खुलासा हुआ कि कई ठेकेदारों और अधिकारियों ने परियोजना के नाम पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।

EOW की सख्त निगरानी में जांच

EOW के अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और कुछ अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। एजेंसी ने साफ किया कि यदि आगे किसी भी अधिकारी या व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है तो पूरक चालान (Supplementary Chargesheet) भी पेश किया जाएगा।