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बस्तर के स्कूलों में बेहतर सुधार…. शिक्षक युक्तियुक्तकरण और नई शिक्षा नीति से विष्णु देव साय की सरकार बस्तर में जगा रही शिक्षा का अलख

रायपुर। प्रदेश में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षक युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से छत्तीसगढ़ के सुदूर जिलों में शिक्षा व्यवस्था सशक्त हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही इस पहल से सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड के विद्यालयों में भी सकारात्मक बदलाव नजर आने लगी है। कभी नक्सलियों के बंदूक की आवाज सुनाई देती थी, अब वहां शिक्षा की अलख सुनाई देती है। अब विद्यार्थियों को नियमित, विषय विशेषज्ञ और प्रशिक्षित शिक्षकों से शिक्षा मिल रही है, जिससे पढ़ाई का स्तर निरंतर सुधर रहा है। शिक्षक युक्तियुक्तकरण की यह पहल न केवल स्कूलों में शिक्षा का वातावरण सुदृढ़ कर रही है, बल्कि इससे ड्रॉपआउट दर में कमी और परीक्षा परिणामों में सुधार भी देखने को मिल रहा है। सरकार का यह प्रयास निश्चित रूप से राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा।

पहले 96 स्कूलों में थे सिर्फ एक टीचर

सुकमा जिले में सरकार की पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किए गए युक्तियुक्तकरण से इन विद्यालयों में अब शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित हो चुकी है। इससे न केवल विद्यालयों में नियमित पढ़ाई हो रही है, बल्कि बच्चों की रुचि भी बढ़ी है और शिक्षकों का कार्यभार भी संतुलित हुआ है। छिंदगढ़ विकासखंड में कुल 390 शासकीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 288 प्राथमिक, 82 माध्यमिक, 13 हाई स्कूल और 07 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। युक्तियुक्तकरण से पूर्व यहां 8 विद्यालय शिक्षकविहीन थे और 96 विद्यालय एकल शिक्षक पर निर्भर थे। यह स्थिति बच्चों की शिक्षा के स्तर को प्रभावित कर रही थी।

अबुझमाड़ में भी दिख रहा असर

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लागू की गई युक्तियुक्तकरण नीति का सकारात्मक असर अब अबुझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। नारायणपुर और ओरछा विकासखंड के सुदूर और पहुँचविहीन गांवों में वर्षों से शिक्षकविहीन चल रहे विद्यालयों में अब योग्य शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इससे इन क्षेत्रों में शिक्षा की तस्वीर तेजी से बदल रही है और विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा की सौगात मिल रही है। शासन की युक्तियुक्तकरण नीति ने यह सिद्ध किया है कि सही योजना, निष्पक्ष क्रियान्वयन और दूरदर्शिता के साथ अगर काम किया जाए, तो सबसे कठिन क्षेत्रों में भी शिक्षा की रोशनी पहुँचाई जा सकती है। नारायणपुर जिले के उदाहरण से स्पष्ट है कि अब अबुझमाड़ जैसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी शिक्षा के क्षेत्र में ठोस बदलाव संभव है।

ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को मिली नई ऊर्जा

ग्राम जड्डा, धोबिनपारा, ईकरभट्टी, मोहनार, कस्तुरमेटा, गट्टाकाल, हिरंगई, नेलांगुर, ताड़ोबेडा, पुसालामा और पदमेटा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों में अब शिक्षक पदस्थ हो चुके हैं। साथ ही जबगुंडा, थुलथुली, रेकावाया, लंका, काकवाड़ा, पुंगारपाल, हितवाड़ा जैसे कई उच्च प्राथमिक विद्यालयों को भी युक्तियुक्तकरण के अंतर्गत शिक्षक उपलब्ध कराए गए हैं। इससे इन स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियों को गति मिली है और बच्चों की उपस्थिति में सुधार देखा जा रहा है।

शिक्षकों और पालकों को भी राहत

पूर्व में शिक्षकविहीन स्कूलों में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को अतिरिक्त भार लेकर पढ़ाना पड़ता था। इससे न केवल अध्यापन प्रभावित होता था, बल्कि पालक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे। अब नई पदस्थापना से शिक्षकों पर से बोझ कम हुआ है और पालकों में भी संतोष का वातावरण है।