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ग्रामीण विकास में सरपंचों की है महत्वपूर्ण भूमिका – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

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Shiv Mar 10, 2026 3 min read

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

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Shiv Mar 10, 2026 1 min read

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Shiv Mar 10, 2026 2 min read

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दुर्ग के बाद अब बलरामपुर में अफीम खेती का मामला सामने आया

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March 10, 2026

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अग्निपथ: राहुल गांधी की तरह दीपक बैज की छत्तीसगढ़ में ‘न्याय यात्रा’

रायपुर।   छत्तीसगढ़ में आज से कांग्रेस की 6 दिवसीय न्याय यात्रा की शुरुआत हो गई है. न्याय यात्रा का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष बैज कर रहे हैं. यात्रा की शुरुआत उन्होंने संत गुरु घासीदास बाबा की तपोभूमि गिरौदपुरी से की. यात्रा शुरू करने से पूर्व बैज शिवरीनारायण धाम भी पहुंचे और सोनाखान जाकर शहीद वीरनारायण सिंह को नमन भी किया.

प्रभु और पुरखों को याद करने के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी बैज ने आशीर्वाद लिया, कार्यकर्ताओं को जोहार किया, स्नेह किया, प्यार किया, स्वागत-सत्कार किया. ढोल-नगाड़े, गाजे-बाजे के बीच बैज पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. चरण दास महंत, टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, कवासी लखमा, मोहन मरकाम सहित अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं की टोली के साथ बाबा गुरुघासी दास की तपोस्थली पहुँचे. बाबा को प्रणाम किया और छत्तीसगढ़वासियों की न्याय के लिए ‘मनखे-मनखे एक बरोबर’ का संदेश देते हुए यात्रा पर निकल पड़े.

बैज की न्याय यात्रा का यह पहला चरण है. इस पहले चरण में वे बलौदाबाजार के गिरौदपुरी से रायपुर तक करीब 130 किलोमीटर की यात्रा करेंगे. 6 दिवसीय यात्रा का समापन राजधानी रायपुर में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर होगा. हर दिन यात्रा में पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे और कांग्रेस की एकजुटता का संदेश देंगे. जैसे यात्रा के पहले दिन पार्टी के नेताओं ने दी है.

बैज की यह यात्रा एक तरह से राहुल गांधी की न्याय यात्रा की तरह ही है. राहुल गांधी ने भी देश भर में भारत जोड़ो न्याय यात्रा की थी. अब ठीक उसी अंदाज में पूरे ताम-झाम, लाव-लश्कर, नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी भीड़ के साथ दीपक बैज छत्तीसगढ़ में न्याय यात्रा कर रहे हैं.

दीपक बैज की यह यात्रा कई मायनों में खास है. और उनके लिए अग्निपथ की तरह है. वो इस लिहाज से क्योंकि उनके अध्यक्ष रहते छत्तीसगढ़ में दो महत्वपूर्ण चुनाव हुए और दोनों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा. पहला चुनाव विधानसभा और दूसरा चुनाव लोकसभा का था. इन दोनों ही चुनाव में हार के बाद से कांग्रेस में कई लोग पार्टी में व्यापक बदलाव के नारे के साथ उठ खड़े हुए थे, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व का भरोसा बैज पर कायम रहा. बैज ने अपने अध्क्षीय कार्यकाल का एक साल पूरा किया और आगे बड़ी चुनौतियों के साथ दूसरे कार्यकाल की ओर बड़ चले हैं.

कहते हैं कि पदयात्रा से नेताओं को बड़ी ऊर्जा और ताकत मिलती है. यात्रा हमेशा से ही भविष्य के लिए कारगर साबित होती रही है. इसके कई उदाहरण अतीत में हुए तमाम राजनीतिक और सामाजिक यात्राओं से मिलते हैं. दीपक बैज के लिए तो राहुल गांधी की यात्रा ही सबसे बड़ा उदाहरण है. इसमें कोई संदेह नहीं कि पदयात्रा से निकलने वाले परिणाम को बैज बेहतर समझते होंगे.

यही वजह ही कि बैज ने बिना देर किए ही सही मौके पर अपने पदयात्रा की शुरुआत कर दी है. बैज के लिए सही अवसर दो तरह से है. पहला अवसर प्रदेश में कानून व्यवस्था का इन दिनों सबसे बड़ा मुद्दा है. एक बाद एक हो रही बड़ी घटनाओं ने कांग्रेस को सत्ता पक्ष के खिलाफ एक बड़ा प्रदेशव्यापी मुद्दा दे दिया है. इसमें बलौदाबाजार में कलेक्टर-एसपी कार्याकाल आगजनी और कवर्धा के लोहारीडीह कांड सबसे बड़ा है. जिसे सदन से लेकर सड़क तक भुनाने में कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. इसके साथ ही दूसरा अवसर आगामी महीनों में छत्तीसगढ़ में होने वाला निकाय और पंचायत चुनाव है.

बैज निश्चित ही इन अवसरों को पार्टी की सफलता में बदलना चाहते हैं. और यह बताना चाहते हैं कि वे चुनौतियों से घबराने वाले नहीं हैं. लेकिन चुनौतियों का सामना तो बैज को अंदर भी करना पड़ रहा और बाहर भी. साथ और समर्थन पार्टी और जनता से कितना मिल पाया यह तो 2 अक्टूबर समापन के साथ पता चलेगा. फिलहाल तो बैज युवा जोश लिए अग्निपथ पर चल पड़े हैं.