युक्तियुक्तकरण के बाद अटैचमेंट का खेल: बवाल मचने पर 29 शिक्षकों का अटैचमेट हुआ रद्द
बीजापुर। युक्तियुक्तकरण इस दावे के साथ पूरे प्रदेश में किया गया था कि शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षक मिल जायेंगे। ग्रामीण इलाकों में बच्चों को शिक्षा का बराबर का अधिकार मिलेगा, शहरी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का संतुलन बनेगा, लेकिन अफसर ही सरकार की मकसद पर पलीता लगा रहे हैं। पहले युक्तियुक्तकरण के नाम पर जमकर मनमर्जी की गयी और अब दुरस्थ इलाकों में पदस्थ किये शिक्षकों को अटैचमेंट के बहाने शहरी इलाकों में लाने का खेल शुरू हो गया।
बीजापुर में तो हद ही हो गयी, जहां युक्तियुक्तकरण के तहत ग्रामीण इलाकों में पदस्थ किये गये 29 शिक्षकों को फिर से शहरी इलाकों में पदस्थ कर दिया गया। कलेक्टर के 29 शिक्षकों के अटैचमेंट के आदेश पर जब बवाल मचा, तो अब अटैचमेंट को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। साथ ही अटैच किये गये शिक्षकों को 2 दिनों के भीतर मूल शाला में ज्वाइन करने का आदेश दिया गया।
दरअसल 14 अगस्त को कलेक्टर ने 29 शिक्षकों को मर्सी दिखाते हुए उन्हें शिक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उनके मनमुताबिक स्थानों पर अटैच कर दिया। अटैचमेंट का जो हवाला दिया गया था, वो काफी हास्यास्पद था। कारण बताया गया था कि .युक्तियुक्तकरण के तहत पदस्थ संस्थाएं दुरुस्थ, अंदरुनी व अतिसंवेदनशील होने के कारण महिला शिक्षिकाओं की सुरक्षा और पहुंचविहीन होने के कारण गंभीर बीमारी से पीड़ित व दिव्यांग पुरुष शिक्षकों को अध्यापन कार्य के लिए अटैच किया जा रहा है।
लेकिन इस आदेश को लेकर शिक्षकों ने तीखा विरोध जताया था। शिक्षकों की दलील थी कि अगर अटैचमेंट का लाभ शिक्षकों को मिल रहा है, तो ये सभी शिक्षकों के लिए लागू होना चाहिये, ना कि कुछ चुनिंदा शिक्षकों के लिए….। विरोध लगातार बढ़ रहा था, जिसकी वजह से अब अटैचमेंट आदेश को रद्द कर दिया गया है।









