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March 9, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

NHM के बाद अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी खोला मोर्चा

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का गुस्सा एक बार फिर सड़क पर फूट पड़ा। सोमवार को प्रदेश के 33 जिलों में एक साथ काम बंद और तालाबंदी की गई। इस आंदोलन में एक लाख से अधिक महिला कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने हिस्सा लिया। बिलासपुर जिले की भी करीब 2 हज़ार महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर रैली निकाली और कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

मांगें अभी भी अधूरी

आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि दशकों से सेवाएं देने के बावजूद आज तक उन्हें न तो कर्मचारी का दर्जा मिला और न ही जीने लायक वेतन। पेंशन, ग्रेच्युटी, बीमा और स्वास्थ्य सुविधाएं भी अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन तक उन्हें नहीं मिल रहा है, जबकि उनके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

डिजिटल कामकाज से परेशान

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार डिजिटल युग में उन्हें बिना संसाधन उपलब्ध कराए ऑनलाइन कार्य करने के लिए मजबूर कर रही है। मोबाइल, टैबलेट और इंटरनेट सुविधा के अभाव में फेस कैप्चर, पोषण ट्रैकर और THR वितरण जैसे काम बेहद कठिन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना सुविधा दिए जबरन ऑनलाइन काम कराने का दबाव उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से चुनौती है।

गैर विभागीय कामों का बोझ

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार गैर विभागीय कार्यों में उलझाकर रखा जा रहा है। कभी चुनावी कार्य, कभी जनगणना और कभी सर्वेक्षण जैसे अतिरिक्त काम उन पर थोपे जाते हैं। इसके चलते वे अपने मूल विभागीय कार्यों पर ध्यान नहीं दे पातीं। उन्होंने मांग की कि उन्हें ऐसे गैर विभागीय कार्यों से अलग रखा जाए और केवल विभागीय कार्य कराए जाएं।

सरकार से सीधी अपील

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि बार-बार आंदोलन करने के बावजूद अभी तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। अगर जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।

आंदोलन का असर

प्रदेशभर में तालाबंदी और काम बंद से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पोषण आहार वितरण और आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित गतिविधियाँ ठप रहीं। ग्रामीणों को भी इसकी परेशानी झेलनी पड़ी।