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दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ में पकड़ी गई अफीम की खेती, पुलिस हिरासत में झारखंड का एक आरोपी

रायगढ़। रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तमनार ब्लॉक के आमाघाट क्षेत्र में करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध खेती पकड़ी गई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और खेत में लगी पूरी फसल को नष्ट कर दिया।

झारखंड कनेक्शन आया सामने

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस अवैध खेती के पीछे झारखंड के एक व्यक्ति का हाथ है। आरोपी ने स्थानीय किसान से खेत किराए पर लिया था और उसे तरबूज व ककड़ी की खेती के नाम पर इस्तेमाल किया जा रहा था।पुलिस ने मौके से मार्शल सांगां नाम के एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जो झारखंड का निवासी बताया जा रहा है। उससे पूछताछ जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है।

पहाड़ी और सुनसान इलाके में चल रही थी खेती

आमाघाट क्षेत्र पहाड़ी और अपेक्षाकृत सुनसान इलाका है, जहां लोगों का आना-जाना कम रहता है। यही वजह है कि तस्करों ने इस जगह को अवैध खेती के लिए चुना।जानकारी के अनुसार, यह इलाका झारखंड सीमा के करीब स्थित है, जिससे इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देना और भी आसान हो जाता है।

15 दिनों में चौथा मामला

प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से अफीम की अवैध खेती के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बीते 15 दिनों में यह चौथा मामला है, जिसने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

दुर्ग में भाजपा नेता का मामला

इससे पहले 7 मार्च को दुर्ग जिले के समोदा में एक बड़े मामले का खुलासा हुआ था, जहां भाजपा नेता विनायक ताम्रकर द्वारा करीब 5 एकड़ से अधिक जमीन पर अफीम की खेती की जा रही थी।पुलिस ने वहां से लगभग 7.88 करोड़ रुपये मूल्य के अफीम के पौधे जब्त किए थे और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।

बलरामपुर में भी दो बड़े खुलासे

इसके बाद 10 मार्च को बलरामपुर जिले के कुसमी क्षेत्र में 3.67 एकड़ में अफीम की खेती पकड़ी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब 4.75 करोड़ रुपये का माल जब्त किया था।फिर 12 मार्च को बलरामपुर के ही कोरंधा गांव में करीब ढाई एकड़ जमीन पर अफीम की खेती सामने आई, जिसे प्रशासन ने नष्ट कर दिया।

संगठित नेटवर्क की आशंका

लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश में अफीम की अवैध खेती कोई एक-दो घटनाएं नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में इस तरह की खेती को छिपाकर किया जा रहा है, जिससे कानून से बचा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध खेती के खिलाफ अभियान को और तेज किया जाएगा। साथ ही, इसमें शामिल पूरे गिरोह को पकड़ने के लिए जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।