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विद्युत विभाग की कार्रवाई: 81 कनेक्शन काटे, बकायादारों में हड़कंप

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March 8, 2026

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यूजीसी के समता विनियम 2026 पर अभाविप की आपत्ति: स्पष्टता और संतुलन की मांग

रायपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी अधिसूचना “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026” के उद्देश्य को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने महत्वपूर्ण बताया है, लेकिन साथ ही इसके प्रावधानों में स्पष्टता और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया है। अभाविप का कहना है कि यूजीसी और सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतांत्रिक मूल्यों की मूल भावना को बनाए रखना चाहिए, जहां प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हों और देश भेदभावमुक्त व समतामूलक बने।

अभाविप ने कहा कि संगठन हमेशा से शैक्षणिक परिसरों में सकारात्मक, सौहार्दपूर्ण और समतायुक्त वातावरण के निर्माण के लिए कार्य करता रहा है। ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। परिषद का मानना है कि यूजीसी के इस समता संबंधी विनियम में प्रयुक्त कुछ शब्दों और प्रावधानों को लेकर समाज, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भ्रम और अस्पष्टता की स्थिति बनी हुई है, जिसे दूर किया जाना जरूरी है।

अभाविप ने मांग की है कि यूजीसी इस विषय में त्वरित संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित पक्षों से संवाद करे और स्पष्टता प्रदान करे, ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो। चूंकि यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए संगठन का कहना है कि यूजीसी को शीघ्र अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए न्यायालय में हलफनामा दाखिल करना चाहिए।

इस संबंध में अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि शैक्षणिक परिसरों में सौहार्द और समानता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। सभी वर्गों के लिए सामाजिक समानता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार के भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विनियम को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए यूजीसी को तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सके और सभी विद्यार्थियों के लिए भेदभावमुक्त वातावरण सुनिश्चित हो सके।