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सरकारी राशन दुकान में सेंधमारी, ताला तोड़कर 26 क्विंटल चावल और इलेक्ट्रॉनिक कांटा ले उड़े चोर

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

अवैध प्लाटिंग पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 1 एकड़ जमीन पर हो रहे निर्माण पर लगाई रोक

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

दुर्ग। दुर्ग जिले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के द्वारा किए…

March 8, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस, फ़िर अंबेडकर के डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

रायपुर।  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय ने चिकित्सा जगत में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक 40 वर्षीय व्यक्ति की जान बचाकर ‘स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर’ (SCAR) का सफल ऑपरेशन किया है। यह छत्तीसगढ़ का पहला और दुनिया के दुर्लभतम मामलों में से एक है।

रायपुर के रहने वाले एक 40 वर्षीय दुकानदार सुबह घर पर ब्रश कर रहे थे, तभी अचानक उनके गले में असहनीय दर्द हुआ और देखते ही देखते गर्दन में भारी सूजन आ गई। कुछ ही मिनटों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन उन्हें तत्काल अंबेडकर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में जब मरीज की सीटी एंजियोग्राफी की गई, तो डॉक्टर भी दंग रह गए। जांच में पता चला कि मरीज की दायीं कैरोटिड आर्टरी (मस्तिष्क तक खून ले जाने वाली मुख्य धमनी) स्वतः ही फट चुकी थी और वहां खून का गुब्बारा (Pseudoaneurysm) बन गया था।

विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि आमतौर पर यह धमनी किसी चोट, संक्रमण या ट्यूमर के कारण फटती है, लेकिन बिना किसी बीमारी के इसका अपने आप फट जाना (Spontaneous Rupture) अत्यंत दुर्लभ है। मेडिकल जर्नल के आंकड़ों के अनुसार, पूरे विश्व में अब तक ऐसे केवल 10 मामले ही दर्ज हुए हैं। इस अभूतपूर्व सफलता पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर ने पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए एक मील का पत्थर बताया।

जोखिम भरी थी सर्जरी, लकवे का था खतरा

डॉ. साहू के नेतृत्व में टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को हाथ में लिया। इस सर्जरी में सफलता की दर मात्र 50 से 60% होती है। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क में खून का थक्का पहुंचने से मरीज को लकवा मार सकता था या उसकी मौत हो सकती थी।

ऑपरेशन में शामिल विशेषज्ञ दल:

सर्जन: डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष)

एनेस्थेटिस्ट: डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू

जूनियर डॉक्टर्स: डॉ. आयुषी, डॉ. अंशिका, डॉ. ख्याति, डॉ. आकांक्षा, डॉ. संजय, डॉ. ओम प्रकाश

नर्सिंग एवं तकनीकी स्टाफ: राजेन्द्र, नरेन्द्र, चोवा, भूपेन्द्र, हरीश व अन्य।