Special Story

भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन, धान समिति प्रबंधक निलंबित

भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन, धान समिति प्रबंधक निलंबित

ShivFeb 28, 20251 min read

सरगुजा।  अमेरा धान समिति के प्रबंधक जगदीश राजवाड़े पर निलंबन…

नान घोटाला : पूर्व महाधिवक्ता सतीशचंद्र को राहत, सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

नान घोटाला : पूर्व महाधिवक्ता सतीशचंद्र को राहत, सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

ShivFeb 28, 20252 min read

नई दिल्ली/रायपुर।  छत्तीसगढ़ के पूर्व महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा को बड़ी…

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में बूम! देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल होने की ओर

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में बूम! देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में शामिल होने की ओर

ShivFeb 28, 20253 min read

रायपुर।    छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है…

तेज रफ्तार ट्रक ने अधेड़ को रौंदा, शव के उड़े चिथड़े, आरोपी चालक फरार

तेज रफ्तार ट्रक ने अधेड़ को रौंदा, शव के उड़े चिथड़े, आरोपी चालक फरार

ShivFeb 28, 20251 min read

खैरागढ़।   छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में फिर से रफ्तार का कहर…

February 28, 2025

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

पुलिस की वर्दी में ठग : सस्ते में जमीन दिलाने के नाम पर पुलिसवालों को लगाया करोड़ों का चूना, आरोपी हवलदार गिरफ्तार

रायपुर। राजधानी रायपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पुलिसकर्मी ने ही अपने साथियों को करोड़ों की चपत लगा दी. सस्ते में जमीन दिलाने का झांसा देकर लाखों-करोड़ों ऐंठने वाला यह हवलदार खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) का अफसर बताता था, जिससे पुलिसकर्मी भी उसकी बातों में आ जाते. पांच साल से फरार चल रहे इस ठग पुलिसकर्मी को आखिरकार सिविल लाइन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. इस ठगी मामले में उसके तीन साथी पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं.

करोड़ों की ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपी जयदेव वर्मा हवलदार के पद पर तैनात था. साल 2019 में टिकरापारा, गुढ़ियारी, सिविल लाइन और गंज इलाके में उसने अपने ही साथियों को जमीन दिलाने के नाम पर लाखों-करोड़ों की ठगी की. जयदेव ने पहले तो कम कीमत में जमीन देने का झांसा दिया और जब पुलिसकर्मियों ने पैसे दे दिए, तो वह बहाने बनाने लगा. जब पीड़ितों ने रकम वापस मांगी, तो उसने जल्द पैसा लौटाने का वादा किया लेकिन फिर गायब हो गया.

मामला जब एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद के संज्ञान में आया, तो उन्होंने सिविल लाइन पुलिस को जयदेव वर्मा की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए. पुलिसकर्मियों की शिकायतों के आधार पर जांच की गई, जिसमें जयदेव वर्मा के खिलाफ ठगी के आरोप साबित हुए. जांच में यह भी पता चला कि उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए खुद को एसीबी में तैनात अधिकारी बताया था, जिससे वह अपने साथी पुलिसकर्मियों का विश्वास जीतने में सफल हो गया.

इस ठगी में जयदेव वर्मा अकेला नहीं था, बल्कि उसके तीन और साथी भी शामिल थे. इनमें से एक राज कश्यप समेत तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है.