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सरकारी राशन दुकान में सेंधमारी, ताला तोड़कर 26 क्विंटल चावल और इलेक्ट्रॉनिक कांटा ले उड़े चोर

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

अवैध प्लाटिंग पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 1 एकड़ जमीन पर हो रहे निर्माण पर लगाई रोक

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

दुर्ग। दुर्ग जिले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के द्वारा किए…

March 8, 2026

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EOW कोर्ट में पेश हुए 28 आरोपी अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट के कागजात और एक-एक लाख का जमानत पट्टा जमा करने पर मिली जमानत

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आरोपी बनाए गए 28 अधिकारी आज EOW की विशेष अदालत में पेश हुए. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक सभी अधिकारी अग्रिम जमानत के कागजात लेकर कोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट में 1-1 लाख रुपए का जमानत पट्टा जमा करने पर सभी को जमानत दे दी गई.

बता दें कि सभी अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत पहले ही मिल चुकी है. EOW के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में 32 सौ करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है. इस मामले में आबकारी विभाग से जुड़े 29 अफसरों को ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया है और उसके खिलाफ चालान पेश किया था. 29 अफसरों में से 7 रिटायर हो चुके हैं. बाकी बचे 22 अधिकारियों को सरकार ने निलंबित कर दिया है. इन पर 2019 से 2023 के बीच 90 करोड़ रुपए की अवैध वसूली करने का आरोप है. हाईकोर्ट से 18 अगस्त को अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने पर सभी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी. मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी 28 अफसरों को शर्तों के साथ जमानत दे दी थी. आज सभी अग्रिम जमानत के कागजात लेकर EOW की विशेष अदालत में पेश हुए.

वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के 15 बड़े जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा बिना ड्यूटी चुकाई गई देसी शराब (B-Part शराब) की शासकीय दुकानों में समानांतर अवैध बिक्री की गई. बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर चयनित जिलों में अधिक खपत वाली देसी शराब दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ समानांतर बेचा जाता था.

इस पूरे नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, सेल्समैन, सुपरवाइजर, आबकारी विभाग के जिला प्रभारी अधिकारी, मंडल व वृत्त प्रभारी, और मैन पावर एजेंसी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे. अवैध शराब को “बी-पार्ट शराब” कहा जाता था और इससे अर्जित रकम सीधे सिंडीकेट के पास पहुंचाई जाती थी।