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सरकारी राशन दुकान में सेंधमारी, ताला तोड़कर 26 क्विंटल चावल और इलेक्ट्रॉनिक कांटा ले उड़े चोर

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

कवर्धा। जिले के पिपरिया थाना क्षेत्र के ग्राम बानो में चोरों…

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

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Shiv Mar 8, 2026 2 min read

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय…

छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजीपी विश्वरंजन का निधन, पटना के मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विश्वरंजन का शनिवार…

अवैध प्लाटिंग पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 1 एकड़ जमीन पर हो रहे निर्माण पर लगाई रोक

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Shiv Mar 8, 2026 1 min read

रायपुर। राजधानी रायपुर में अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग के…

भाजपा नेता के खेत से 8 करोड़ का अफीम जब्त, मक्के के बीच पांच एकड़ से अधिक में उगाई थी फसल

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Shiv Mar 7, 2026 2 min read

दुर्ग। दुर्ग जिले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के द्वारा किए…

March 8, 2026

Apni Sarkaar

जो कहेंगे सच कहेंगे

200 बैंक कर्मियों ने परिजनों सहित प्रदर्शन कर बैंक अधिकारियों की हुई गिरफ्तारी का जताया विरोध

रायपुर।    इंडियन ओवरसीज़ बैंक के रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष प्रदेशभर से आए लगभग 200 बैंककर्मी अपने परिजनों सहित एकत्र हुए और हाल ही में छत्तीसगढ़ में कुछ बैंक अधिकारियों की हुई गिरफ्तारियों के विरोध में अपनी गहरी नाराज़गी और भय व्यक्त किया।

इस संदर्भ में, आल इंडिया बैंक अधिकारी महासंघ (AIBOC) छत्तीसगढ़ राज्य इकाई के राज्य सचिव वाई गोपाल कृष्णा ने कहा कि लगातार हो रही गिरफ्तारियों और पुलिस की चेतावनी ने पूरे बैंकिंग समुदाय को गहरे भय और असुरक्षा के वातावरण में डाल दिया है । सभी बैंक अधिकारी बैंक की निर्धारित नीतियों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही खाते खोलते हैं। यदि केवल खाते खोलने की प्रक्रिया को आधार बनाकर निर्दोष अधिकारियों को दोषी ठहराया जाएगा तो भविष्य में अधिकारी खाते खोलने से हिचकिचाएँगे। इससे सरकार की वित्तीय समावेशन योजना गंभीर रूप से प्रभावित होगी और अंततः आम नागरिक को ही सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

कॉमरेड गोपाल कृष्णा ने स्पष्ट किया कि किसी भी अधिकारी की संलिप्तता यदि ठोस प्रमाणों के साथ सिद्ध होती है तो उसका समर्थन नहीं किया जाएगा। लेकिन केवल आशंका या सतही आधारों पर अधिकारियों को गिरफ्तार करना न्यायोचित नहीं है।

सभी बैंक अधिकारियों ने राज्य प्रशासन और पुलिस से यह आग्रह किया कि किसी भी कार्रवाई से पूर्व ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए जाएँ, तथ्यों की जाँच विशेषज्ञ बैंक अधिकारियों की राय लेकर की जाए और निर्दोष अधिकारियों को प्रताड़ित न किया जाए।